🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

गुरुवाणी - पूज्य प्रेमनाथजी महाराज

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

गुरुवाणी
पूज्य प्रेमनाथजी महाराज
सिरे मंदिर, जालोर

1. ओ साधु भाई ओ ळु , गु राँ सा री आवे ।
घड़ी पलक माने चैन नहीं आवे, ऐसा सतगुरु भावे।
ओळु गुराँसा री आवे......................................................।

2.़ नावडियों तो नाव-2, चलावे, समुद्र पार लगावे।
सतगुरु नाव सत री हाक-2, भव से पार लगावे।।
ओ साधुभाई ओळु.............................................................।

3. गंगा नहावे जमना नहावे और गोमती नहावे।
भांत-भांत रा तीर्थ नहावे, गुरु बिन ऐला जावे।
ओ साधु भाई........................................................................।

4. जप-तप नेम जोग सब साजे, गुरु बिन कुण समझावे।
कर सतसंग देख घट भीतर, दरसन घट मांय जावे।
ओ साधु भाई........................................................................।

5. डुबतडा ने सतगुरु तारे, चरणे चित्त लगावे।
चेतन ब्रह्म ही आत्म दरसन, बुँद सागर में मिल जावें।
ओ साधु भाई........................................................................।

6. वेद पढने उल्टा हाले, आपो आप फँस जावे।
जन्म-जन्म चैरासी भटके, मोक्ष फेर ना पावे।
ओ साधु भाई........................................................................।

7. शांतिनाथजी यूं समझावे, अवसर हाथ नहीं आवे।
सतगुरु चरणे प्रेमनाथ बोले, हिरदे पट गुरु खोले।।
ओ साधु भाई........................................................................।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 29।

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