🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

अपनी बात - श्री मधुसूदन व्यास

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

प्रेरणास्पद जीवन......
श्री मधुसूदन व्यास
जालोर

जालोर की पवित्र भूमि ऐतिहासिक काल से ही शौर्य, वैराग्य एवं ज्ञान की
भूमि रही है। अनादि काल से यह त्रिवेणी इस धरा को सिंचित करती रही है और
इसी के परिणाम स्वरूप आज भी यह भूमि समय-समय पर नर रत्नों को जन्म देती
रही है।
परम पूज्य शांतिनाथ जी महाराज ऐसे ही विलक्षण नर रत्न थे जिन्होंने इस
धरा पर जन्म लेकर जालोर के गौरव को सब दिशाओं में बढाया। नर से नारायण
बनने की संकल्पना और ध्येय भारतीय जन मानस में सनातन काल से रहा है। प.पू.
शांतिनाथ जी महाराज अपने जीवन और आचरण से हम सबके सामने इसका
साक्षात उदाहरण रखा है। पूज्य पिताजी रघुनंदनजी के समय से ही उनसे सम्पर्क
का सौभाग्य मुझे मिला । श्रीराम शिला पूजन एवं गंगा रथयात्रा के समय महाराजजी
के निकट रहने का काफी अवसर मिला । जीवन के वे पल अत्यन्त अमूल्य हैै।
शांतिनाथजी महाराज सही अर्थो में संत थे ।। न काहू से दोस्ती न काहू से बैर ।।
अत्यन्त कम बोलना, उपदेश से नहीं वरन आचरण से शिक्षा देना और
अनासक्त जीवन व्यतीत करना महाराज का स्वाभाविक स्वरूप था। अत्यन्त
साधारण परिवेश में जन्म लेकर आध्यात्मिक क्षेत्र में उनके द्वारा प्राप्त की गयी
ऊचाईयाँ अनुकरणीय है।
महाराजजी अत्यन्त महान थे। अपनी सतत साधना और समर्पित जीवन से
उन्होंने जनमानस में अत्यन्त गहरी श्रद्धा का स्थान पाया। उनके जैसा कठिन
साधनामय जीवन अपनाकर ही कोई व्यक्ति उनके जैसा बन सकता है। वैसी श्रद्धा
पा सकता है। ऐसा हमें मानना चाहिए। ऐसा मानने से उनके जैसा जीवन जीने की
प्रेरणा मिलेगी । उनके जीवन का कुछ अंश भी यदि हम अपने जीवन में उतार पाए
तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजली होगी। पूज्य महाराज का आशीर्वाद हम सभी
पर बना रहे यही प्रार्थना हैं। पुस्तक के सफल प्रकाशन हेतू शुभकामनाएँ।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 4।

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