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संस्कृति शोध परिषद्: एक परिचय

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

संस्कृति शोध परिषद - एक परिचय

संस्कृति अतीत धारा का प्रवाहमान बिन्दू है। बिन्दू ही नहीं वरन यह साक्षात सिंधु
है। मानवीय जीवन के इतिहास विकास का सेतु संस्कृति है। संस्कृति कालचक्र के प्रवाह में
कभी प्रकटी कभी लुप्त हुयी । परंतु जिस संस्कृति में प्राकृतिक एवं मानवीय आक्रमणों को
सहन करने की क्षमता जीवन्त रही, वही अक्षुण्ण बनी रही । किसी संगठन या संस्था का
निर्माण बीज से वृक्ष बनने की कहानी होता है। यह शाश्वत सत्य है कि सृजन बड़े कष्ट से
होता है।
हमारी मिट्टी की सौंधी खुश्बू में वीरता, विद्वता, धीरता, त्यागमय जीवन और श्रेष्ठ
आध्यात्मिक ज्ञान का तेज विद्यमान है। हमारे समक्ष जालोर जिले का गौरवमयी इतिहास
अपनी बाहें फैलाकर हमारी संस्कृति की जीवंतता का साक्षी हो बार-बार पुकार रहा था।
अपनी संस्कृति शोध परिषद का बीज 13 जुलाई 2008 को खोडेश्वर महादेव के शिव
लीलामयी प्राकृतिक सौन्दर्य में कुछ युवा मनों के द्वारा समाज में समर्पित किया गया ।
इस अल्प अवधि में ही कुछ विशिष्ट कार्यो, कार्यक्रमोंं एवं ऐतिहासिक दृष्टि से
महत्वपूर्ण तथ्यों को प्रकाश में लाकर परिषद ने जालोर जिले के प्रबुद्ध वर्ग के मन में अपना
विशिष्ट स्थान बनाया है। उल्लेखनीय कार्यो में जालोर स्थापना दिवस चैत्र शुक्ल एकम को
मनाने की परंपरा, जालोर के ऐतिहासिक युद्ध का तिथि निर्धारण, जालोर जिले का पर्यटन
मानचित्र, महर्षि जाबालि का चित्र, जालोर गौरवगाथा, जालोर जिले की सामान्य ज्ञान
प्रश्नोत्तरी इत्यादि समाज को समर्पित किया । हमारे प्रयासों का सिंचन तब हुआ जब
जालोर शहर के प्रबुद्ध वर्ग का अविस्मणीय आशीर्वाद बालिका उ.मा. वि., जालोर में कान्हड
दे प्रबन्ध ग्रंथ के 555 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित विचार गोष्ठी में प्राप्त हुआ । किसी पुस्तक
का जन्मोत्सव मनाने का सभंवत यह पहला ही प्रयास था ।
संस्कृति शोध परिषद जालोर जिले के गौरवमयी इतिहास को विश्व मंच पर
उभारने का एक प्रयास है, स्वत्व जागरण का अनुष्ठान है, पिछडेपन के कलंक को धोने की
जिद है। बुद्धि, शौर्य, तप और वैभव के क्षेत्र में जालोर जिले की वैश्विक विरासत को उभारने
का संकल्प है संस्कृति शोध परिषद ।
संस्कृति शोध परिषद एवं ऐसे ही सम वैचारिक विविध प्रयत्नों के सुपरिणाम भी
धीरे-धीरे सामने आ रहे है। पर्यटन मानचित्र एवं पर्यटन नक्शे पर जालोर उभर कर सामने
आया है। विविध प्रतियोगी परिक्षाआें में जालोर जिले से संबंधित प्रश्न पूछने की संख्या में भी
वृद्धि हुई है। जालोर जिले के विविध पक्षो से संबधित शोध कार्यो में भी वृद्धि हुई है। वास्तव
में तो संस्कृति शोध परिषद कोई औपचारिक संगठन नहीं होकर एक विचार है, सकारात्मक
सक्रियता का नाम है। कार्य क्षेत्र स्पष्ट है जालोर जिला ।
आइये आप हम सब मिलकर जालोर जिले को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर वह स्थान
एवं सम्मान दिलाएँ जिसका जालोर स्वभाविक हकदार है।
जय जालोर ।

टीम संस्कृति शोध परिषद्-जालोर, भीनमाल, सांचोर
संदीप जोशी अशोकसिंह ओपावत संजय राठौड़
निदेशक अध्यक्ष सचिव

कल्पेश बोहरा सांवलसिंह राव नीलम पंवार विनोद कुट्टी वचनाराम विद्यार्थी
दीपाराम मेघवाल दीपकराज परमार देवराज चैधरी गजेन्द्रसिंह सिसोदिया ।

।। क्षमा याचना ।।
यद अक्षरम पदम भ्रष्ट्, मात्रा हिनम च यत भवेत ।
तत सर्वं क्षम्यताम देव, प्रसीद परमेश्वर ।।
(इस पुस्तक में मात्रा, वर्तनी, शब्द या वाक्य रचना की
दृष्टि से तो त्रृटि रह गयी हो उनके लिए क्षमा करें)

अत्यन्त आदर सहित
जय नाथजी री
सा

संदीप जोशी
जन्म - 1982
शिक्षा - ठणै,बण्एठण्म्कण्
अधिस्नातक - इतिहास, लोक प्रशासन
शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक शिक्षक के रुप में पहचान है।
अनेक मौलिक नवाचारों एवं विशिष्ट प्रयोगों के लिए जाने जाते है।
उच्च प्राथमिक स्तर पर राज्य की पहली विज्ञान प्रयोगशाला,
प्राथमिक कक्षाओं में बस्ते का बोझ कम करने के उपाय एवं विद्यालय के बरामदे में भारत दर्शन
गलियारे के अभिनव नवाचार ने व्यापक पहचान दी ।
शिक्षा विषय पर इनका विशेष अध्ययन है। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शोध
गोष्ठियो एवं सेमीनारों में भाग लिया है।
सामाजिक दायित्व - छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में नगर मंत्री से लेकर
राज. प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद सदस्य तक के विभिन्न दायित्व रहे हैं।
पुस्तक - सिंह गर्जना (स्वामी विवेकानन्द)
प्रकाशन पुस्तक - सबके नाथजी (संत शान्तिनाथजी के जीवन पर आधारित)
अनुवाद ग्रन्थ (गुजराती से) - अधिजनन शास्त्र, आहार शास्त्र
अनुवाद पुस्तिका (गुजराती से) -प्लास्टिक की चड़चड़, श्रीसुक्त (प्रकाशनाधीन)
शिविरा पत्रिका में विविध आलेख प्रकाशित हुए है। मारवाड़ चेतना में महर्षि जाबालि
पर शोध आलेख एवं इन्टरनेट पत्रिका विस्फोट.काॅम में आलेख प्रकाशन ।
आकाशवाणी पर 3 बार वार्ताओं का प्रसारण हुआ है।
वर्तमान में निदेशक संस्कृति शोध परिषद्, जालोर ।

नीलम पंवार
जन्म - 1976
शिक्षा - ठण्।ण्एठण्म्कण्
अधिस्नातक - हिन्दी साहित्य

परम पूज्य शांतिनाथ जी महाराज की परम भक्त शिष्या ।
एक प्रकार से महाराज की मानस पुत्री ।
बालिका शिक्षा के क्षेत्र में विशेष कार्य एवं अनुभव । आदर्श विद्या मन्दिर
बालिका माध्यमिक, जालोर में 12 वर्षो तक प्रधानाचार्या के रूप में कार्य करने का अनुभव ।
शिक्षा एवं महिला संगठनो से सक्रिय रूप से जुड़ी है । बालिका शिक्षा विषय पर इनका
विशेष अध्ययन है। विशुद्ध भारतीय जीवन पद्धति पर आधारित महिला संगठनों के द्वारा नारी
सशक्तिकरण के कार्य में संलग्न। वर्तमान में विभाग प्रमुख राष्ट्र सेविका समिति।
प्रकाशित पुस्तक - सबके नाथजी (संत शान्तिनाथजी के जीवन पर आधारित)

शौच, उदर-क्रिया, स्वभावज्ञान, अभ्यास
आसन, वैराग्य, अनाहार, प्राण-धारण
मुद्रा, काया-क्लेश, जप, तप, ध्यान
तीर्थ-सेवन, देवार्चन, भक्ति, आश्रमपालन
षड्दर्शन, केश-धारण, मुंडन आदि दैहिक
साधनों से परम पद की प्राप्ति कदापि नहीं होती हैं।
सिद्ध पुरुष अदैहिक साधनों का आश्रयण कर
परम पद की प्राप्ति सिद्ध करते हैं। अदैहिक साधनों
में स्थिति गुरु की कृपा से प्राप्त होती है,
इस लिए गुरु से बड़ा कोई नहीें ।
इसी पुस्तक से.....

।। ढ ।।
प्रकाशक :
संस्कृति शोध परिषद्, जालोर


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 53।

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