॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥
।। भक्तों की भावांजलि ।।
शिल्पशास्त्र के परमज्ञाता थे महाराज जी ।
- श्री कैलाशकुमार, सोमपुरा, मुण्डारा
शांतिनाथजी महाराज परम ज्ञानी थे, उन्हें शास्त्रों का ज्ञान था। आध्यात्मिकता
के साथ-साथ भवन निर्माण कला, शिल्प शास्त्रों की बारीकी का भी ज्ञान था ।
मेरे ऊपर भी बावजी की बडी कृपा रही है । सन 1989 की बात है । जब मैं
छोटी उम्र में आलासन हनुमान मंदिर का कार्य कर रहा था । उस समय पीरजी
बावसी वहां पधारे थे । बावजी ने परिचय पूछा कि भाई किया गांव रा हो तब मैने
उत्तर दिया बावजी सुंधाजी मोतिलालजी सोमपुरा का लडका हूँ। तब बावजी ने
फरमाया कि मेरे गुरुभाई अमरनाथजी की समाधि का कार्य रेवत में करवाना है
इसलिए जालोर आकर मिलना । 2-3 दिन बाद मैं जालोर गया एवं बावजी के साथ
रेवत जाकर साइट देखी फिर नक्शा बनाकर बावजी को दिया । बावजी ने नक्शा
पास किया। यह कार्य लगभग 2-3 लाख तक का हो गया । जब कार्य आधा हुआ
तब पीरजी बावजी काम देखने पधारे एक खम्बे को देखकर कहा भाई खम्बा अच्छा
बनाया है तो मैने विनम्रता पूर्वक उत्तर दिया कि बावजी मैंने तो शास्त्र प्रमाण से
बनाया है। तब बावजी ने वचन फरमाए कि तुम्हारा शास्त्र सही है । खूब काम करो
और आगे बढो। अमरनाथजी की पूजना रखना । उसी दिन जब मैं सुंधाजी पहुुँचा तो
पिताजी ने बताया जाखडी, धाणसा, भादरड़ा, मुड़तरा, निम्बज, कागमाला, भीनमाल
से आॅर्डर आए है एवं वहां जाना है। एक महीने में ही सब जगहों के नक्शें पास हो
गए । यह बावजी के वचनों का ही फल हैं। अमरनाथजी बावजी की समाधि पूर्ण होने
के बाद जब भी बावजी बुलाते, मैं चला जाता। बावजी त्रिकालदर्शी थे वो आत्मा की
बात जानते थे । उनके सामने झूठ नहीं बोल सकते। उनके सानिध्य में सुंधाजी,
भादरड़ा, बैरठ, डकातरा, रेवतड़ा, बिशनगढ़, सामतीपुरा, खेड़ा, ओटवाला, रोजिया
ढाणी, देवकी, सिरे मंदिर, बालवाड़ा, जसोल माता राणी भटियाणी, नागाणा, रेवत,
आलासन में कार्य किया एवं कर रहे है ।
लगभग 25 वर्षों तक मुझे बावजी का सानिध्य व स्नेह मिला । बावजी हमारे
मुण्ड़तरा वाले घर पर पगलिये करने भी पधारें। हमारे ऊपर बावजी की बडी
अनुकम्पा रही । देवलोक गमन से पहले 20.9.2013 को हमारे घर पधारे। 23.9.2012
को राठौड़ो की कुलदेवी नागाणा धाम का पूरा काम देखा एवं आशीर्वाद दिया ।
बावजी के साथ मुझे भी उदयपुर जाना था । लेकिन मैं मध्यप्रदेश के देवास में काम
संभालने चला गया और अन्तिम दर्शन नहीं कर पाया । पूज्य बावजी जाते-जाते भी
मेरा कल्याण कर गए । मेरे वेबसाईट पर पूज्य बावजी का फोटो देखते ही देवास में
मुझे काम का आॅर्डर मिल गया। पूज्य बावजी की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे,
यही प्रार्थना हैं ।
स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 47।
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