॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥
।। आडम्बर और दिखावे से दूर ।।
परम पूज्य निर्मल स्वरूपजी महाराज
अखिल भारतीय वैदिक धर्म प्रचार आश्रम
जम्मू, (जम्मू कश्मीर)
नाथ सम्प्रदाय के पूर्वाचार्यों के उपरांत यदि किसी महापुरुष योगी सिद्ध
महात्मा को इतनी लोकप्रियता एवं जनमानस की श्रद्धा की पात्रता प्राप्त हुई है तो
राजस्थान के इतिहास में यह श्रेय परम श्रद्धेय सिद्ध पीर श्री ब्रह्मलीन शांतिनाथजी
महाराज को ही प्राप्त हुआ ।
पीर शांतिनाथजी महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी थे एवं राजस्थान के
समस्त महात्माओं में अग्रगण्य होने पर भी परम शांत एवं सरलता के साथ-साथ परम
दयालु भी थे। निष्पक्ष व्यक्ति एवं सर्वभूतहितेरता: जैसे बहूमूल्य गुणों के कारण
समस्त महात्मा एवं जनमानस में अत्यन्त लोकप्रिय भी माने जाते थे।
वर्तमान काल में छोटा सा पद मिलने पर भी तथाकथित महात्मा आडम्बर का
आश्रय लेकर जनमानस को जहां भ्रमित कर रहे है वहीं पीर श्री शांतिनाथजी महाराज
आडम्बर एवं दिखावे के कट्टर विरोधी होने के साथ-साथ स्पष्ट वक्ता थे।
उन्होंने अपने तपोबल के आधार पर इस क्षेत्र को जाग्रत ही नहीं किया अपितु
महात्माओं के लिए भी अपने जीवन को आदर्श रूप में स्थापित किया । आप सनातन
धर्म के सजग प्रहरी की तरह निरंतर वैदिक वर्णाश्रम धर्म के प्रचार-प्रसार एवं सरंक्षण
में रत रहे एवं आहार शुद्धि, आचार विचार आदि को लेकर भी अत्यन्त गंभीर थे ।
एकाएक उनके देवलोकगमन से सनातन धर्म की जो क्षति हुई है यद्यपि
उसकी पूर्ति तो नहीं की जा सकती तथापि उनके जीवन चरित्र को अपने जीवन का
लक्ष्य बनाकर यदि हम जीवन यापन करें तो हमारा दैहिक, आत्मिक कल्याण
अवश्यम्भावी होगा ।
।। इति शुभम ।।
स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 19।
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