🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

योग सूत्र के ज्ञाता थे महाराजजी - पूज्य तीर्थगिरीजी महाराज

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

।। योग सूत्र के ज्ञाता थे महाराजजी ।।

परम पूज्य तीर्थगिरीजी महाराज
हम सभी का अत्यन्त सौभाग्य है कि हमें पूज्य शांतिनाथजी महाराज का
सानिध्य मिला । वे परमयोगी थे और सही अर्थो में संत थे । आज के समय में ऐसा
संत मिलना कठिन हैं । वे स्वभाव से अत्यन्त सरल, सुलभ एवं दयालु थे । बहुत बडी
संख्या में लोग उनके भक्त थे । बडे़-बडे़ धनाढ्य, राजनीतिज्ञ एवं अधिकारीगण
उनके चरणों में सिर नवाते थे । किंतु बावजी को इस बात का बिल्कुल भी अहंकार
नहीं था। वे निरंकारी संत थे। सबके प्रति साम्यभाव रखते थे । अनेक बडे़ बडे़
कार्यक्रमों मेंं मुझे उनके पास बैठने का अवसर मिला । वे सबका बहुत ध्यान रखते थे
एवं खूब स्नेह करते थे ।
नाथजी बावसी आडम्बर एवं दिखावे से बहुत दूर थे एवं बहुत कम बोलते थे, मगर जो
भी महंत उनके पास आते, वे उनसे बहुत ही स्नेह पूर्वक मिलते, बातचीत करते एवं
उन्हें सम्मान देते थे। वे वचन सिद्ध थे एवं उनका आशीर्वाद अमोघ था ।
एक खास बात जो मैं कहना चाहता हूं कि वह यह कि बावसी परमयोगी थे
तथा योग के बारें में जानते थे। महर्षि पतंजलि ने प्राचीन शास्त्रों में जो आठयोग
यम-नियम प्राणायाम........समाधि बतलाए हैं, बावसी उनका क्रियात्मक रूप थे ।
योगसूत्र को वे भलीभांति जानते थे एवं स्वयं नियमित रूप से योग भी करते थे। परंतु
वे इसका दिखावा नहीं करते थे। बहुत वर्षों पहले (लगभग 16-17 वर्ष) एक बार हम
एक कार्यक्रम से जोधपुर होकर वापस आ रहे थे तो वहां मै भी बावसी के साथ था ।
बावसी प्रात: जल्दी चार बजेे उठकर योग कर रहे थे । मैने उन्हें जलनेति, शीर्षासन
आदि योग-आसन करते हुए देखा । मुझे बहुत अच्छा लगा एवं स्वयं को भी योग
करने की प्रेरणा मिली ।
वे वास्तव में परमयोगी थे । योग का क्रियात्मक स्वरूप थे । शिवजी के
परमभक्त थे एवं शिव स्वरुप थे । आज भी संत समाज में उनकी कमी खलती है एवं
हम हमेशा उन्हें याद करते है । उन्हें बारम्बार प्रणाम.......।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 21।

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