॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥
।। भक्तों की भावांजलि ।।
बांझन को पुत्र मिले, भक्त करे सेवा.....
- श्री अम्बालाल सोनी, जालोर
इस संसार में गुरु की महिमा अपरम्पार है। गुरु ही इंसान को सही राह पर
चलना सीखाते है। ताकि वह हमेशा ऊँचाईयों को छूता रहे। गुरु के बिना इंसान के
जीवन में अन्धेरा छा जाता है। गुरुदेेव नाथजी श्री परम पूज्य श्री 1008 नाथजी
शांतिनाथजी के चरणों में बार-बार नममस्तक ।
मैं भी अपने जीवन में इस महान आत्मा की अनुभूति के लिए सिरेमन्दिर अपने
पिताजी गोविन्दरामजी के साथ जाया करता था । यह बात सन 1958 की है। जब
परम पूजनीय श्री केसरनाथजी महाराज ‘चित्तहरणी’ के जंगलों में अपनी तपस्या में
लगे रहते थे।
नाथजी के बारे में जितना कहें उतना कम हैं। आपके मुख से निकला वाक्य
अपने भक्तों के लिए वरदान सिद्ध होता था।मैंने तो नाथजी के चमत्कार को प्रत्यक्ष
देखा है जब पूनम के दिन अन्य भक्तों की तरह एक दम्पत्ति जोड़ा सिरे मन्दिर पर
दर्शन के लिये आये।
वे भँवर गुफा के दर्शन कर नाथजी के पास आये। उन्होंने नाथजी महाराज से
जयनाथ जी की और वहाँ पर बैठे । फिर महिला ने नाथजी से बात की कि और कहा
दाता मुझे बच्चा नहीं है। तब नाथजी भँवर गुफा के धुणे से भभूती लेकर आये और उस
औरत को खाने के लिए हाथ आगे करने को कहा । उस महिला ने भभूती खाई फिर
नाथजी ने उस दम्पति जोड़े से भगवान से प्रार्थना करने को कहा। कुछ वर्ष के बाद
वह दम्पति जोडा सिरे मन्दिर आया तब तक उन्हें 2 बच्चो की प्राप्ति हो गई थी और
उन्होने नाथजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
नाथजी ने पूरे भारत वर्ष में हमारे जालोर भूमि को अच्छे धार्मिक स्थल के रूप
में स्थापित किया है। धन्य है यह धरा जहां पर ऐसे दिव्य-शिव स्वरूप नाथजी ने जन्म
लिया । हम धन्य हो गए। परम पूजनीय श्री शान्तिनाथजी के चरणों में बार-बार मेरा
प्रणाम ।
जय नाथजी की ।
स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 45।
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