🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

चातुर्मास विवरण

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

श्री श्री 1008 श्री शांतिनाथजी महाराज के चातुर्मास

जगत कल्याणी भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण विशेषता है इसकी
गौरवशाली संन्यास परम्परा । और इस गौरवशाली संन्यास परम्परा की अद्भुत
विशेषता है चातुर्मास। पूज्य शांतिनाथजी महाराज ने 1981 से लेकर 2012 तक
प्रतिवर्ष लगातार चातुर्मास किए । श्रद्धालु बताते हैं कि पूज्य बावजी के चातुर्मास
बिराजने का दिन हो और उस दिन वर्षा न हुई हो, ऐसा कभी नहीं होता था। कम हो
या अधिक लेकिन उस दिन वर्षा अवश्य ही थी, मानो इन्द्र भगवान स्वयं अभिनंदन
कर रहे हों। यहां महाराजजी के सभी 32 चातुर्मास की सारणी प्रस्तुत है।

क्र.सं. सम्वत वर्ष स्थान क्र.सं. सम्वत वर्ष स्थान
1. 2038 1981 बैरठ 18. 2055 1998 सिरे मंदिर
2. 2039 1982 चूरा 19. 2056 1999 डकातरा
3. 2040 1983 सिरे मंदिर 20. 2057 2000 भागली सिंधलान
4. 2041 1984 धाणसा 21. 2058 2001 खण्डप, बाड़मेर
5. 2042 1985 सिरे मंदिर 22. 2059 2002 बैरठ
6. 2043 1986 सिरे मंदिर 23. 2060 2003 सिरे मंदिर
7. 2044 1987 सिरे मंदिर 24. 2061 2004 सिरे मंदिर
8. 2045 1988 सिरे मंदिर 25. 2062 2005 श्री भैरुनाथजी
9. 2046 1989 चूरा अखाडा
10. 2047 1990 सिरे मंदिर 26. 2063 2006 सिरे मंदिर
11. 2048 1991 सिरे मंदिर 27. 2064 2007 स्वर्णगिरी दुर्ग,जालोर
12. 2049 1992 चूरा 28. 2065 2008 आशापुरी माताजी,
13. 2050 1993 सिरे मंदिर मोदरा
14. 2051 1994 रेवतड़ा 29. 2066 2009 बालवाड़ा
15. 2052 1995 मुण्डिया 30. 2067 2010 सिरे मंदिर
महादेव, बिशनगढ़ 31. 2068 2011 चूरा
16. 2053 1996 देबावास 32. 2069 2012 बोकड़ा
17. 2054 1997 चित्तहरिणी
रेवत गांव

।। श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नम: ।।

द्वितीय - खण्ड
हे ऋषिवर शत शत वंदन......
इस ग्रंथ का यह भाग अत्यन्त विशिष्ट है
इस भाग में पूज्य संत-महात्माओं के
शांतिनाथजी महाराज के प्रति आत्मीय
भावों, विचारों का संग्रह है। सौभाग्य
से सभी संतों ने पूज्य नाथजी महाराज
के व्यक्ति्व की विभिन्न विशेषताओं
का उल्लेख किया है।
उन सब विशेषताओं को मिलाते ही
उनका दिव्य स्वरुप स्पष्ट हो जाता है।
जिन पूज्य संत-महात्माओं तक हम नहीं
पहुँच पाये, उनसे करबद्ध क्षमा याचना ।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 12।

Post a Comment

0 Comments