🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

ओळु आवै आपरी - श्री हिंगलाज दान चारण

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

औळु आवै आपरी

- श्री हिंगलाज दान चारण

1
गयो गौरव जालोर रो, हिरदे लागी हूक ।
छोड़ सिधार्या नाथजी, म्हासूं कांई वेगी चूक।।
जन-जन री अरदास, नाथजी ऐकर आवो।
बिलखे है जालोर, थे म्हाने धीरज बधावो।।
आख्यां आंसू नी रुके, मन में घोर अंधार।
राह दिखावो नाथजी, म्हे सिमरू बारम्बार ।।
नाथ बिना अनाथ हुओ, ओ म्हारो जालोर।
विधि रो केड़ो खेल है, नी लागे किणरो जोर।।
अब देवो आशीष, राखजो लाज हमारी ।
जग जाणे जालोर, इतनी अरदास हमारी ।।
2
चोखा परचा आपरा, चोखा आपरा काज ।
ओळू आवे आपरी, सिमरे सकल समाज ।।
इन्द्र लीनी परीक्षा, पाणी दियो सुखाय।
तप बल भारी आपरो, वाव दियो छलकाय।।
घर-घर पगला मांडिया, खूब कियो उपकार ।
दया राखजो नाथजी, थाने जपू बारम्बार ।।
स्वीकार करो प्रणाम म्हारो, हे नाथो के नाथ।
बुद्धि, विद्या, बल, आपजो, पूरण करजो काज ।।
अब देवो आशीष, राखजो लाज हमारी।
सिमरे है हिंगलाज, राखजो लाज हमारी ।।

3
हिरदे दर्द अपार, नाथजी री याद सतावें।
सिमरू बारम्बार, कुण म्हारे धीरज बंधावे।।
उज्ज्वल परचा आपरा, अमर आपरो नाम।
जग चावा जालोर में जबर आपरो धाम।।
सिरे मंदिर सुखधाम, आज विरानो लागे।
ओळू आवे आपरी, नैणा नीर बहावे।।
सिमरे टाबर आपरा, रोवे रूंख अपार।
दर्शन देजो नाथजी, म्हे जपूं बारम्बार ।।
शिवजी रो अवतार, आपरो तप है भारी।
सिमरे हे हिंगलाज, राखजो लाज हमारी।।
4
जन्म-भोम जालोर में, प्रकट्या शांतिनाथ।
पग-पग परचा आपिया, खूब बढायो मान।
सदा धरम के कारणे, आप रह्या अगवान।
पाणी सुख्यो वाव में, जद लाज बचाई आप।।
घर-घर पूजे आपने, सिमरे सकल समाज ।
नवकूंटी रा नाथ थे, पूरण करजो काज ।।
किण विद भूलूं आपने, किण विद ध्यान धरूं।
मेहर करजो नाथजी, करबद्ध नमन करूं।।
अब देजो आशीष, राखजो किरपा थारी।
अरज करे हिंगलाज, राखजो लाज हमारी ।।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 32।

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