🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

गुरु बिन घोर अन्धेरा - श्री ओखाराम चौधरी

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

।। भक्तों की भावांजलि ।।
गुरु बिन घोर अंधेरा .............
- श्री ओखाराम चैधरी, सामतीपुरा

श्री श्री 1008 श्री पीरजी महाराज को मैं ओखाराम बार-बार वंदना करता हूँ
। हमारे गांव सामतीपुरा पर महाराज की विशेष कृपा रही । उन्होंने बार-बार हमें
धर्म के बारे में, ज्ञान के बारे में उपदेश दिये और हमें धर्म की राह पर चलना
सिखाया। बावजी ने जर्जर हो गये पुराने मठ मंदिरों का जिर्णोद्वार करवाया, नव
निर्माण भी करवाये। हमारे गांव में भी 4-5 मंदिर बनवाये। पहले विष्णु भगवान का
मंदिर बनवाया, फिर रामदेवजी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करवायी। उसके बाद चांदरा
माता मन्दिर का निर्माण शुरू करवाया जिसका काम अभी चालू है। उसके बार
जलंधरनाथजी के मंदिर का मुहूर्त कर गए हैं । उनकी कृपा से ही इसका निर्माण भी
पूरा होगा ।
हमारे तो गुरु महाराज थे इसलिए हमारे ऊपर विशेष मेहरबानी थी। बोकड़ा
चातुर्मास से लौटते समय सामतीपुरा होकर पधारे थे। तब कहा था कि मैं तो जा रहा
हूॅं देर हो रही है । हमको लगा कि अखाडे जाने में देर हो रही है मगर कुछ समय
बाद ही उन्होंने शरीर छोड़ दिया। यह हमारे लिए बहुत दु:ख की बात हैं, इस दु:ख
को शब्दो में नहीं कहा जा सकता । हमारे गांव में पहले पीने का पानी नहीं था । गांव
वालों ने उनसे प्रार्थना की । उनके दिशा-निर्देश में हमने दो जगह ट्यूवबेल खोदे
तो दोंनो जगह मीठा पानी मिला। हम अनेक वर्षों से मीठे पानी के लिए तरस रहे थे
। यह किल्लत उनकी कृपा से ही मिटी है। बावजी हमारी बहुत चिंता करते थे।
संवत 2030 में जब बाढ़ का पानी गांव मेें भर गया था। गांव पानी में डूब गया था।
तब महाराज जी ने हमारे लिए वहां बैठे-बैठे ही महादेवजी से प्रार्थना की एवं उनकी
कृपा से सामतीपुरा और सरदारगढ़ बचे। महाराजजी ने स्वयं हमारी रक्षा के लिए
प्रसाद बोली थी (मन्नत रखी थी) । हमारे उपर उनकी बहूत मेहरबानी रही । तीन
दिन तक गांव में पानी भरा रहा लेकिन यहां कोई नुकसान नहीं हुआ । बाद में
जब-जब हमने प्रार्थना की उन्होंने हमारे संकट दूर किए, हमारे कष्ट हर लिए । जब
भी गांव पधारते तो हमे यही शिक्षा देते की धर्म के रास्ते पर चलो, गायों का ध्यान
रखों, उनकी सेवा करों। एक गाय तो पालनी ही चाहिए, यह उनका आग्रह रहता था
। हमारे गांव के अधिकांश लोग उनका आशीर्वाद लेकर देसावर गए एवं बावजी की
कृपा से सबका व्यापार अच्छा चल रहा है । बावजी की कृपा से गांव में समृद्धि आयी
है । सभी लोग उनका फोटो लेेकर देसावर जाते है एवं वहां सफल हुए हैं।
बावजी की कृपा हम पर सदैव बनी रही, यही प्रार्थना है । ’’’’’


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 48।

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