🚩 सिरे मंदिर जालोर • जय श्री नाथजी महाराज री हुक्म 🚩

चित्रांजलि - परम पूज्य शांतिनाथजी महाराज

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

पंचम्- खण्ड - चित्राजंली
पूज्य संतो के साथ में नाथजी

चित्रावली

स्वाध्याय के पल........।

विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा के
हस्ताक्षर अभियान का शुभारम्भ
महाराजजी ने स्वयं हस्ताक्षर
करके किया ।

ऊँ गौ -मंगलम्, गौ मात मंगलम्.........
गौशाला में गायों की
सार संभाल करते पीरजी

पीरजी महाराज को
देखकर गौ माता में उमड़ा स्नेह

गाय को दुलारते हुए
नाथजी

गौ की सेवा स्वयं
प्रभु भी करके कहलाए
गोपाल.......।

गुरु वंद्य महान......

अपने पूज्य गुरु केसरनाथजी
महाराज की समाधि पर नमन
करते हुए नाथजी महाराज ।

गुरुबर्रह्मा गुरुर्विष्णु
गुरुर्देवो महेश्वर:।

गुरुसाक्षात परब्रह्म
तस्मै श्री गुरवै नम:।।

अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पर
भव्य मन्दिर का निर्माण हो यह
हर भारत वासी का सपना है ।
पूज्य शांतिनाथजी महाराज का
भी इस आंदोलन को आशीर्वाद
प्राप्त हुआ । श्रीराम शिलापूजन
के विभिन्न कार्यक्रमों में महाराजजी
का सहभाग हुआ था ।
.
ऐसे ही एक कार्यक्रम की झलकियां
चित्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के
वरिष्ठ प्रचारक माननीय हस्तीमलजी
भाई साहब के साथ में माननीय
प्रकाशचन्द्र जी गुप्ता, तत्कालीन
जिलाप्रचारक ब्रजेशजी, मधुसुदनजी
व्यास और ऋषिकुमारजी खडे है।

पूज्य शांतिनाथजी महाराज बालिका
शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने
सदैव शिक्षा के महत्व के बारे में
अपन भक्तों को मार्गदर्शन किया
और बालक-बालिकाओं में भेद
नहीं करने की भी शिक्षा दी ।

पूज्य शांतिनाथजी महाराज समय-समय
पर शिक्षण संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों
से शिक्षा एवं संस्कारों पर बातचीत करते
थे। आदर्श विद्या मंदिर बालिका माध्यमिक
के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए ।

नाथजी महाराज शिक्षा के साथ संस्कारो पर भी आग्रह
करते थे । अनेक शिक्षण संस्थानो का शिलान्यास,
शुभ-मुहूर्त उनके शुभ कर कमलो से हुआ । ऐसे ही
आदर्श विद्या मंदिर जालोर का शिलान्यास करते
नाथजी महाराज । साथ में खड़े है विश्व हिन्दू परिषद्
के अन्तर्राष्ट्रीय कार्य अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल,
तत्कालीन शिक्षा मंत्री श्री ललित किशोर जी चतुर्वेदी एवं
श्री सत्यपालजी हर्ष ।

आध्यात्मिकता और भक्ति के साथ-साथ पर्यावरण
संरक्षण की भी शिक्षा देते थे नाथजी महाराज ।
महाराजजी ने सिरे मंदिर की पहाड़ियो पर बड़ी संख्या
में वृक्षारोपण करवाया एवं भक्तों को भी इस दिशा
में प्रेरित किया । और अपने अन्तिम क्षणो तक भी
समाज सेवा का यह भाव बना रहा । बोकड़ा में हुऐ
अन्तिम चार्तुमास में वहां के वरिष्ठ समाज सेवी
श्री कल्याणसिंह बालावत को पौधा भेंट करते
नाथजी महाराज ।

प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के प्रति
महाराज को गहरी श्रद्धा थी। राजकीय आयुर्वेद
चिकित्सालय, जालोर में नवीनतम सुविधाओं का
उद्घाटन महाराजजी के कर कमलों से हुआ था।
चित्र में आयुर्वेद चिकित्सा के नवीनतम उपकरणों
की जानकारी लेते हुए ।

बोकड़ा में सम्पन्न
32 वें चातुर्मास की
झलकियां

विविध धार्मिक
कार्यक्रमों में पूज्य महाराजजी
का पावन सानिध्य मिलता
रहा है ।
श्री अशोकजी सिंघल के साथ

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ओळु आवै आपकी, सिमरू बारम्बार...........।

99

विश्व गुरु भारत की
अद्भुत ज्ञान परम्परा.....
गुरु शिष्य परम्परा.....

सिरे मन्दिर
में भंवर गुफा
पर मन्दिर
नव-निर्माण का
भूमि पूजन करते हुए ।

श्री नागाणा धाम निर्माण कार्य का अवलोकन करते हुए ।

जय जयकार नहीं इस तन की, जय जयकार नहीं इस पद की
जय जयकार है इस कर्मण की, जो अच्छे कर्म किये इस तन से।।

प.पू. श्री शान्तिनाथजी
महाराज की
अन्तिम यात्रा
दिनांक 2-10-2012

।। श्री गुरु चरण कमलेभ्यो नम: ।।

षष्टम - खण्ड
गुरु बिना घोर अन्धेरा.....
परम पूज्य शांतिनाथजी महाराज,
भारत की प्राचीन
संन्यास परम्परा के वाहक........
एक दिव्य विभूति.............
स्वयंमेव चमत्कार...............
सच्चे सद्गुरु................
मानो साक्षात शिवस्वरूप........
और
ऐसे ही उनके महान भक्त
गंगा जैसी पवित्र
उनकी भावनाएँ...............
सागर जैसी अथाह
उनकी श्रद्धा....................
मेरा परम सौभाग्य
प्रभु ने इस
पुस्तक के लिए मेरा
चयन किया ।
यह उनकी कृपा का ही फल है।
मूंक करोति वाचालम्..........
केवल एक ही बात अत्यन्त आदर सहित

।। जय नाथजी री सा ।।


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 35।

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