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श्री शांतिनाथ गौशाला संस्था: एक परिचय

॥ जय श्री शांतिनाथजी महाराज ॥

।। भक्तों की भावांजलि ।।
श्री शांतिनाथ गौशाला संस्था-एक परिचय

परम पूज्य श्री शांतिनाथजी महाराज ने शिव स्वरूप में अवतरित होकर
सनातन धर्म एवं संस्कृति का संरक्षण किया है। देव मन्दिरों का जीर्णाेद्वार, प्राण
प्रतिष्ठा कर सर्वत्र दैविक शक्तियों को जागृत किया। पूजनीय गुरुदेव को आडम्बर
पसन्द नहीं थे। वे भक्त जनों के श्रद्धा के केन्द्र थे। आपने गौ, ब्राह्मण एवं धर्म की
रक्षा को विशेष महत्व दिया। आपकी परम कृपा से गौवंश रक्षार्थ गौशाला की
स्थापना बाकरा रोड़, बाकरा गांव एवं सुरियाली मड़गांव में की गई। आपने गौमाता
हेतु गौशाला में नर गौवंश की (नन्दी) अलग व्यवस्था कर संरक्षण करने हेतु विशेष
आदेश दिया।
श्री गुरुदेव ने फरमाया था कि गौशालाएँ सभी संचालित करते हैं लेकिन नर
गौवंश (साॅड एवं टोगड़े) की अलग व्यवस्था नहीं करते हैं। गौशाला में गौवंश इतना
ही रखना चाहिये जितनों की सेवा करने की क्षमता हो अर्थात जिनका खर्च बजट के
अनुसार वहन किया जा सके। गौ सेवा तभी हो सकती है जब व्यक्ति अपने माता के
रूप में गाय एवं पिता के रूप में नन्दी मानकर भक्ति भावना से राज दिलीप की तरह
सेवा करे। इन्ही आदर्शो को मद्देनजर रखते हुए श्री शान्तिनाथ गौशाला संस्था
बाकरा रोड़ की स्थापना हेतु दिनांक 1.2.1988 को गौशाला का भूमि पूजन श्री 1008
श्री शांतिनाथजी महाराज के कर कमलों से किया गया। श्री शांतिनाथ गौशाला
संस्था बाकरा रोड़ का पंजीयन संख्या 1/97-98 हैं । दिनांक 13 अक्टूम्बर 2000
संवत 2057 आसोज सुदी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को शुभारंभ किया गया । वर्तमान में
गौशाला के पास 110 बीघा भूमि सूरियाली मडगाँव, 50 बीघा जमीन बाकरा गांव
शिववाड़ी में मय बेरे (ट्यूब वेल) सहित है। इसका मुख्यालय बाकरा रोड़ एवं बाकरा
गाँव के मध्य 0.30 रकबा भूमि पर स्थित है। इसके संस्थापक ट्रस्टी श्री श्यामलाल
सिंहल बाकरा रोड़ श्री फुटरमल शर्मा, जालोर एवं श्री सुरेन्द्र सिंह पंवार जालोर हैं ।
गौशाला के संचालन हेतु ट्रस्ट बनाकर कुुँवर भवानीसिंहजी बाकरा को अध्यक्ष
मनोनीत किया गया। श्री गुरु महाराज के आशीर्वाद से प्रेरणा लेकर इस गौशाला के
गौभक्तों ने रेवतड़ा, बागरा तथा बैरठ गांवों में गौशालाओं की स्थापना कर
गौमाताओं की सेवा, रक्षा एवं पालन-पोषण कर रहे है।
‘‘ संत शिरोमणी गुरुदेव ने गौ ब्राह्मण रक्षार्थ,
जाबालि जलंधर धरा पर लियो आप अवतार ।। ’’
- श्री फुटरमल शर्मा, जालोर


स्रोत: “सबके नाथजी” पुस्तक, संस्कृति शोध परिषद्, जालोर। पुस्तक क्रमांक 27।

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